चक्रधर की चकल्लस
चक्रधर के मस्तिष्क के ब्रह्म-लोक में एक हैं बौड़म जी। बौड़म जी भी एक नहीं हैं, अनेक रूप है उनके। सब मिलकर चकल्लस करते हैं, जिसमें कभी जीवन-जगत की समीक्षाई हो जाती है तो कभी कविताई हो जाती है। यहां आपको जीवंत चकल्लस पढ़ने को मिलेगी। घर के बेलन से लेकर हिन्दी विश्व हिन्दी सम्मेलन तक, जीवन-मरण से लेकर उनके संस्मरण तक, सब कुछ मिलेगा। कभी-कभी कुछ विदुषी नारियां अनाड़ी चक्रधर से सवाल करती हैं, उनके जवाब भी इस चकल्लस में आपको मिलेंगे। यह चकल्ल्स आपको रस देगी, चाहें तो आप भी इसमें कूद पड़िए। लवस्कार!


