Monday, March 01, 2010

होली पर विशेष

होरी पै महंगाई

दीखै उजलौ उजलौ अभी, निगोड़े पर र र र,
दूंगी सान कीच में कानµमरोड़े अर र र र।
कै होरी सर र र र।
बन गई महंगाई इक लाठी, तन पै कस कै मारी रे
बढि़ गए दाम सबहि चीजन के, म्हौं ते निकसैं गारी रे।
होरी पै महंगाई आज दुखी है घर र र र।
कै होरी सर र र र।
दूल्हा बेच, रुपैया खैंचे, जामें हया न आई रे,
छोरी बारे के बारे में, जामें दया न आई रे।
पीटौ खूब नासपीटे कूं, बोलै गर र र र।
कै होरी सर र र र।
डारौ जात-पात कौ जहर, भंग जो तैनें घोटी रे,
नंगे कू नंगौ का करैं, खुल गई तेरी लंगोटी रे।
नेता बन मेंढक टर्रायं, टेंटुआ टर र र र।
कै होरी सर र र र।
छेड़ै भली कली गलियन में, जानैं भली चलाई रे।
तोकूं छोड़ गैर के संग भज गई तेरी लुगाई रे,
डारै दूजी कोई न घास, धूर में चर र र र।
कै होरी सर र र र।
भूली मूल, ब्याज भई भूल, दई दिन दून कमाई रे,
लाला ये लै ठैंगा देख, कि दिंगे एक न पाई रे।
बही-खातौ होरी में डार, चाहे जो भर र र र।
कै होरी सर र र र।
सासू बहू है गई धांसू, आंसू मती बहावै री,
घर ते भोर भए की खिसकी, खिसकी तेरी उड़ावै री।
बल बच गए मगर रस्सी तौ गई जर र र र।
कै होरी सर र र र।
गारी हजम करीं हलुआ सी, ललुआ लाज न आई रे,
तोकूं बैठी रोट खबाय, बहुरिया आज न आई रे।
नारी सच्चेई आज अगारी, पिट गए नर र र र।
कै होरी सर र र र।. .

3 comments:

आचार्य ललित मुनि said...

बन गई महंगाई इक लाठी, तन पै कस कै मारी रे
बढि़ गए दाम सबहि चीजन के,म्हौं ते निकसैं गारी रे।होरी पै महंगाई आज दुखी है घर र र र।

बेहरीन प्रस्तुति-गारी का भी कारण समझ मे आ गया,
होली की हार्दिक शुभकामनाएं
राम राम

निर्मला कपिला said...

गारी हजम करीं हलुआ सी, ललुआ लाज न आई रे,
तोकूं बैठी रोट खबाय, बहुरिया आज न आई रे।
नारी सच्चेई आज अगारी, पिट गए नर र र र।
कै होरी सर र र र।. .
आपकी प्रस्तुती के लिये कुछ कहना वैसे तो सूरज को दीप दिखाने के बराबर है मगर फिर भी मेरे जैसे लोग कहाँ बाज आते हैं ---- बहुत अच्छी लगी। लाजवाब । शुभकामनायें

girish pankaj said...

mahgaai ne aisa khela, ham to saare laal ho gaye,

noch rahe hai saare hamko, hum aise badhaal ho gaye. gurraye mahangaai gar-garr r r r,,

कै होरी सर र र र badhai holi ki...nikal jaane k baad....