Saturday, January 02, 2010

पिच और घिचपिच

चौं रे चम्पू


—चौं रे चम्पू! कहां ते आय रह्यौ ऐ रे? और हाथ में का ऐ?
—आ रहा हूं दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान से और हाथ में हैं बरमूडा की घास के ठूंठ।
—चौं गयौ ओ वहां पै?

—टिकिट के पैसे वापस मिल जाएंगे, यह सोच कर गया था। मैदान में सन्नाटा था। एक तरफ बोतलों, टोपियों, कागजों और चिप्स के खाली पॉलिथिनों का ढेर लगा हुआ था, जिस पर झुण्ड के झुण्ड कौवे बैठे हुए थे। वे भी गुस्से में चोंच न मार दें, यह सोच कर उस तरफ तो नहीं गया, लेकिन पिच पर काफी देर टहल कर आया। समझ में नहीं आया कि पिच में गड़बड़ी क्या थी? हज़ारों दर्शकों की तमन्नाओं पर क्यों पानी फेरा गया? पिच पर ही पानी फेर देते तो बॉल उछाल नहीं लेती। मैं तो समझता था कि क्रिकेट ऐसा खेल है जो कहीं भी, किन्हीं भी, स्थितियों में खेला जा सकता है— बल्ला भी है बॉल भी, संग में डंडे चार, अब देरी किस बात की, किरकिट खेलो यार। खेल ये ठुक ठुक वाला, बड़ा दिलचस्प निराला।

—खेल रोक दियौ, बुरी बात भई!
—बारिश के कारण रोक देते हैं तब भी बुरा लगता है। अरे भीगते-भीगते खेलो, कीचड़ में एकाध फिसल जाएगा और क्या होगा। दर्शकों को दुगुना मजा आएगा— बचपन में खेलें सभी, गली मुहल्ले बीच, पिच की चिन्ता ही नहीं, सूखा है या कीच। लगन यदि सच्ची जागे, फील्ड में दिनभर भागे। क्यों चचा?
—गली-मौहल्ला में जो किरकिट खेलौ करैं, नखरा थोड़े ई दिखामें!
—पर चचा खिलाड़ी लोग जितनी ऊंचाई पर पहुंच जाते हैं उतने ही नखरे बढ़ जाते हैं। राधा अगर चाहे तो दूसरों को छछिया भर छाछ पर नचा ले, खुद नाचने की बारी आई तो नौ मन तेल चाहिए। उछलती बॉल को देखने के लिए परमात्मा ने दो आंखें दी हैं, पर खिलाड़ी आजकल रिस्क नहीं लेते। प्रसिद्धि पाने के बाद उन्हें तो नूरा कुश्ती रोज दिखानी है— डब्ल्यू डबल्यू एफ की, कुश्ती देखें आप। शीघ्र पता चल जाएगा, पहलवान का पाप। चित्त है चारों ख़ाने, भर लिए मगर ख़ज़ाने। लेकिन नूरा क्रिकेट में दर्शकों की जेब पर मार भले ही पड़े, पर खुद मार नहीं खानी— कर थोड़ी सी साधना, पा थोड़ी सी सिद्धि, मिल जाती आराम से चारों ओर प्रसिद्धि। बाद में गोलमाल है, क्रिकिट का यही हाल है। पिच तो दोनों टीमों के लिए एक ही थी। हम भी बड़ी जल्दी विदेशी नखरों की गिरफ्त में आ जाते हैं। बिना बात हल्ला मचा दिया, कोटला में क्रिकेट कलंकित हो गई, क्रिकेट में काला दिन आया। अरे पिच ऊबड़-खाबड़ है या सपाट, खेल के दिखाओ ऑन द स्पॉट। ये क्या कि साहब बरमूडा से घास आएगी, पिच पर लगाई जाएगी, फिर काटी जाएगी, फिर नखरा दिखा के दर्शकों की तमन्ना पर रोलर फिरा दिया जाएगा। वो तो हमारे दर्शक पानी की खाली बोतलें और कुछ कागज फेंक कर ही संतुष्ट हो गए वरना पिच के मिजाज से उनका मिजाज ज्यादा खतरनाक हो सकता था। पहले भी जयसूर्या की उपस्थिति में इसी तरह खेल रोका गया था। क्रिकेट के नाजुक मसीहा, नाजुक सी मामूली बात को कठोर किए दे रहे हैं, बड़े-बड़े सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं, नियम कड़े कर रहे हैं। दो हजार ग्यारह में इसी मैदान पर विश्व कप होना है, कहते हैं कि नहीं होने देंगे।
—भली चलाई! पिच की घिचपिच समझ में नायं आई।
—दो हजार ग्यारह से पहले तो दो हजार दस के राष्ट्रकुल के खेल होने हैं। जिस तरह की हमारी तैयारियां हैं उन्हें देखते हुए तो एक भी खेल न हो पाएगा।

जरा-जरा सी बात पर नुक्ताचीनी करेंगे तो खेल भावना कहां रही। देखना यह चाहिए कि सुविधा या असुविधा हर टीम को समान मिल रही है या नहीं। समान स्थितियों में सम्मान के साथ खेल कर दिखाओ। लंगड़ लड़ाओ, बतंगड़ मत बनाओ। दिल की पिच सही रहनी चाहिए— खेलों का उद्देश्य है, आपस का सद्भाव, ताव दिखाकर जो करें, दिल के पिच पर घाव, प्रेम सीखें कुछ अरसे।
—हां, भेज देओ उनैं मदरसे।

9 comments:

ललित शर्मा said...

सही कहो आपने, जो जित्तो बड़ो खिलाड़ी, उत्ती बड़ी घिचपिच, खेलनो तो आवै नही। चलो आज पिच को ही बहानो मिल गयो। "ना नौ मण तेल होयगो ना राधा नाचैगी।" इनते तो अच्चे हमारे मोहल्ले के बल्लु और लल्लु है। कही पै भी चौको और छक्को जड़ आवे हैं। उन्ने कभी नही कही पिच खराब है। राम-राम

मनोज कुमार said...

बेहतरीन। लाजवाब। आपको नए साल की मुबारकबाद।

aarya said...

सादर वन्दे
क्या खूब कही!
रत्नेश त्रिपाठी

डॉ टी एस दराल said...

दिल की पिच सही रहनी चाहिए— खेलों का उद्देश्य है, आपस का सद्भाव, ताव दिखाकर जो करें, दिल के पिच पर घाव, प्रेम सीखें कुछ अरसे।
बहुत सही कहा अशोक जी। आपको और आपके समस्त परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें।

kapil tripathi said...

theek hi kaha aapne .........
kya khoob hai chakrdhar ki chakalas................???

सुमित तोमर said...

चम्पू शैली
लगी अलबेली
गुरु जी शुभकामनायें...

अजय कुमार said...

सत्य वचन , नव वर्ष मंगलमय हो

Saiyed Faiz Hasnain said...

आप सभी को नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये ।
इस वर्ष अपनी समृद्धि और विकास साथ ही देश के विकास और समृद्धि के लिए एक पौधा अवश्य लगाये !!

eda said...

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