चक्र सुदर्शन जायज़ नाराज़ी बाजी पल्टी कोर्ट में, लौटे वेणु गुपाल, एम हुआ पूरा, उधर, एम्स बजे घड़ियाल। एम्स बजे घड़ियाल, मरीज़ों की क्या चिन्ता, अहंकार का युद्ध, कराहें कोइ न गिन्ता। चक्र सुदर्शन, जायज़ है उनकी नाराज़ी, क्यों होने दी, अस्पताल में आतिशबाज़ी? -अशोक चक्रधर
वे पटाखे चलायेंगे जोर से मरीज चिल्ला भी न पायें गौर से.
कल कहीं हड़ताल न हो जाए आतिशबाजी पर हल्ला मचाने के विरोध में फिर कहेंगे आतिशबाजी चला लो चाहे पर हड़ताल न करना करते रहना पड़ताल मरीज बजायेंगे खड़ताल सिक्यूरिटी की कदमताल ताल ताल तेताला.
इस चक्रधर के मस्तिष्क के ब्रह्म-लोक में एक हैं बौड़म जी। माफ करिए, बौड़म जी भी एक नहीं हैं, अनेक रूप हैं उनके। सब मिलकर चकल्लस करते हैं। कभी जीवन-जगत की समीक्षाई हो जाती है तो कभी कविताई हो जाती है। जीवंत चकल्लस, घर के बेलन से लेकर विश्व हिन्दी सम्मेलन तक, किसी के जीवन-मरण से लेकर उसके संस्मरण तक, कुछ न कुछ मिलेगा। कभी-कभी कुछ विदुषी नारियां अनाड़ी चक्रधर से सवाल करती हैं, उनके जवाब भी इस चकल्लस में मिल सकते हैं। यह चकल्लस आपको रस देगी, चाहें तो आप भी इसमें कूद पड़िए। लवस्कार!
9 comments:
सही कहा आपने. इस अंहकार की लड़ाई में मरीजो की कहा कोई सुनता है. चाहे ये पटाखे चलाएंगे या फ़िर हड़ताल कर देंगे, मरीज का मर्ज कोई नही देखेगा
वे पटाखे चलायेंगे
जोर से
मरीज चिल्ला भी
न पायें
गौर से.
कल कहीं हड़ताल न हो जाए
आतिशबाजी पर हल्ला मचाने
के विरोध में
फिर कहेंगे आतिशबाजी चला लो चाहे
पर हड़ताल न करना
करते रहना पड़ताल
मरीज बजायेंगे खड़ताल
सिक्यूरिटी की कदमताल
ताल ताल तेताला.
आपकी भाषा, व्यंग्य और कथ्य का कायल होते हुए इस प्रकरण पर द:ख भी जताना चाहता हूँ।
***राजीव रंजन प्रसाद
www.rajeevnhpc.blogspot.com
करारा तीर है आपका भाई साहब!!! बधाई.
आपका तो कोई जवाब ही नहीं
वाह-वाह
wah-wah ashok ji what poems you write always.
तीखा कटाक्ष....
ka kahi dada raur batiye aisane hola.
tani ekro dekhin jajhadke.blogspot.com
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