Tuesday, November 27, 2007

डॉ. हरिवंश राय बच्चन के जन्मदिन पर











आज हुए सौ बरस,
आज के दिन पाई जीवन हाला,
जितनी अधिक पुरानी होती
उतना करती मतवाला।
सदा छलक़ते जाम रहेंगे
नाम रहेगा बच्चन का,
सदा रहेंगे पीने वाले
सदा रहेगी मधुशाला।
— अशोक चक्रधर

11 comments:

बाल किशन said...

बहुत अच्छे.

parul k said...

जितनी अधिक पुरानी होती
उतना करती मतवाला।

nice lines....

कंचन सिंह चौहान said...

बच्चन जी के लिये इससे अच्छी श्रद्धांजली क्या हो सकती है।....अति सुंदर

संजय बेंगाणी said...

बहुत खुब. क्या बात है!

Sanjeet Tripathi said...

सुंदर!!
वाकई बहुत बढ़िया!!

pryas said...

चक्रधर जी,
बहुत सुंदर!!!

pryas.wordpress.com

Shiv Kumar Mishra said...

बहुत बढ़िया, सर...

रवीन्द्र प्रभात said...

वेहद सुंदर -सारगर्भित और प्रासंगिक भी !

Dr.Ajeet said...

समीक्षक नज़र तो नही है अपने पास गुरुदेव लेकिन वैसे आपके बहुत बड़े प्रशंसक है हम भी आप हरिद्वार महोत्सव में काव्य पाठ के लिए आए थे तमन्ना तो बहुत थी आपसे मुलाकात की लेकिन हम ठहरे एक मामूली जंतु और आप हिन्दी व्यंग विधा के धवज्वाहक सो आपके करीब पहुचने की हिम्मत न जुटा सके ..... आज ब्लॉग का दुनिया में आपका पता देखा तो ये छोटा सा ख़त लिख दिया...पता नही आपकी नज़र पड़े या न पड़े ....
आपका आशीर्वाद की अपेक्षा में

आपका प्रशंसक
डॉ. अजीत
अपना पता है ...
www.shesh-fir.blogspot.com

tarun said...

Ashok ji
kuch humne bhi likha tha
सुबह से शाम तक कंप्यूटर, रात को तो चाहीये प्याला
काम करके जब थक जाऊं तो तब मुझको चाहीये हाला
यहाँ तो सब नीरस है और होठों पे प्यास बहुत है
हर शाम को ढूंढे आँखे, दील भी चाहे बस मधुशाला

मेरे घर की की एक ही राह है जो पहुंचे बस मधुशाला
मेरी आंखो कि एक ही चाह है जो ढूंढे बस एक प्याला
रात को मेरे ख्वाब में आये सुबह उठते ही मॅन ललचाये
हर दीन की मेरी एक दुआ है, की मिल जाये थोडी सी हाला

जीवनपथ में मुझको जीवनसाथी मिले तो प्याला
कभी जो मेरे कदम रूक जाये तो मुझको मील जाये हाला
जिंदगी की मुश्किल रहो पे चलना भी तो बहुत कठीन है
जब जब थक जाऊं मैं तब तब मील जाये मुझको मधुशाला....

kabhi hamari rachnaye padkar hamari bhi shan badaye:
http://tarun-world.blogspot.com/

-tarun

Rupesh Kumar said...

Ashoka The Great,Magician of hasya Vangya