Thursday, June 14, 2007

बूता और जूता


क्या कहा

उनको झेलने का बूता?

अजी,

उन्हें तो वही झेल सकता है

जो पहन सकता है

नौ नंबर के पैर में

सात नंबर का जूता।

11 Comments:

At 4:05 PM , Blogger Udan Tashtari said...

हा हा, बिल्कुल सही कहा आपने!! ये किसी के बस का नहीं.

 
At 9:55 PM , Blogger राजीव रंजन प्रसाद said...

सही कह रहे हैं आप :)
फिर भी लोग ठूस ठूस कर पहन ही लेते हैं
फिर चाल ही टेढी क्यों न हो जाये।

*** राजीव रंजन प्रसाद

 
At 10:24 PM , Blogger Bhupendra Raghav said...

फिर भी लोग पहनने से बाज़ नही आते हैं,
कभी ऐडी दबाते हैं तो कभी उंगली फ़साते हैं
और फ़िर कहते है!!! यार काट रहा है ।

 
At 10:58 PM , Blogger Sanjeeva Tiwari said...

बडका भाई हमारे छत्तीसगढ में एक कहावत है मुड बडे सरदार के गोड बडे गंवार के ईसीलिये साते नंबर के जुता पहिनाये रहे हो

 
At 12:15 AM , Blogger संजय बेंगाणी said...

जो दिखा रहे है सेम्पल
सात नम्बर के पैर में
हजार नम्बर की चम्पल!!

कैसे पहने कोई? :)

 
At 1:09 AM , Blogger Kavi Kulwant said...

चक्रधर जी आपके संग मंच पर कभी काव्यपाठ का सुयोग चाहता हूँ।
कवि कुलवंत सिंह
http://kavikulwant.blogpost.com

 
At 2:14 AM , Blogger मोहिन्दर कुमार said...

नेता यही जुगत तो अपनाते हैं
जो दस नम्बरी होते हुये भी
देश के कर्णधार बनाये जाते हैं

 
At 2:48 AM , Blogger Neelima said...

वाह बहुत खूब अशोक जी आपका अंदाजे बयां ही है कुछ और

 
At 9:31 AM , Blogger Divine India said...

बड़ी टेढ़ी खीर है यह आपकी मंसा भी उधृत हो रही है कैसे अन्यों के वस्त्रों को डाल मात्र लेने से क्या होता है…!!!

 
At 9:12 AM , Blogger kuldip said...

वाह वाह

 
At 6:49 AM , Blogger lalit said...

कम शब्दाें में इतनी बडी बात़़़़ ़़़़ ़ बहुत खूब

 

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