Saturday, June 23, 2007

नन्ही सचाई



एक डॉक्टर मित्र हमारे
स्वर्ग सिधारे।
असमय मर गए,
सांत्वना देने
हम उनके घर गए।

उनकी नन्ही-सी बिटिया
भोली-नादान थी,
जीवन-मृत्यु से
अनजान थी।
हमेशा की तरह
द्वार पर आई,
देखकर मुस्कुराई।
उसकी नन्ही सचाई
दिल को लगी बेधने,

बोली-
अंकल!
भगवान जी बीमार हैं न
पापा गए हैं देखने।

25 Comments:

At 2:41 AM , Blogger annapurna said...

Ek bahut hi jaane-pahchaane vaakya se itni sunder Rachana.....

Adbhut

 
At 2:48 AM , Blogger Rajesh Roshan said...

जी यही है नन्ही सच्चाई, भावपूर्ण कविता

 
At 5:19 AM , Blogger Pratik said...

नन्ही सच्चाई... मासूम सच्चाई... एक मात्र सच्ची सच्चाई

 
At 6:09 AM , Blogger sajeev sarathie said...

hameshaa ka tarah lajawaab rachna

 
At 6:51 AM , Blogger SANJAY said...

सीधे दिल पर असर कर गई यह नन्ही सचाई.

 
At 6:54 AM , Blogger Rachna Singh said...

aap ki kavitayon per comment nahin likh saktee per chahtee hoon aap meri kavitoyon per kabhie kuch likhae
thanks
http://mypoemsmyemotions.blogspot.com/

 
At 7:26 AM , Blogger Udan Tashtari said...

मासूम की वाणी-दिल को छू गई.

 
At 12:46 PM , Blogger Divine India said...

छू लेने वाली कविता…।
मानवतावाद के विखरे हुए उद्देश्य को अच्छी तरह प्रकट किया है।

 
At 2:20 PM , Blogger Sanjeet Tripathi said...

नही मालूम था कि बौड़म जी ऐसी दिल को छू लेने वाली कविताएं भी लिखते हैं!

 
At 2:32 AM , Blogger Neelima said...

बच्चे का मृत्यु के कारणों से साक्षात्कार बच्चे की ही भाषा में मार्मिक बन पडी है कविता

 
At 9:49 PM , Blogger विकास कुमार said...

मार्मिक कविता

 
At 10:18 PM , Blogger tanha kavi said...

अशोक जी , इस बार दिल को छू लिया आपने। इस बार कोई चकल्लस नहीं हुई।

 
At 11:03 PM , Blogger राजीव रंजन प्रसाद said...

बोली-
अंकल!
भगवान जी बीमार हैं न
पापा गए हैं देखने।

इस पंक्ति के बाद कविता आसमा छू लेती है और हृदय के भीतर बहुत गहरे महसूस होती है। बहुत ही सुन्दर रचना पढवाने का आभार।

*** राजीव रंजन प्रसाद

 
At 6:49 AM , Blogger vinod_parashar1961 said...

बच्चे निश्छल होते हॆ-उनकी निश्छलता को भावपूर्ण अभिव्यक्ती देती सुंदर रचना.कई सालों के बाद आपकी नयी कविता पढने को मिली हॆ.

 
At 9:05 AM , Blogger Kuldip said...

चक्रधरजी आपको ब्लोग्साईट पर देख कर एक सुखद अनुभव हुआ। अक्सर यहां अनछपे कवि ही दिखते हैं। एक जाना पहचाना हस्ताक्षर को यहां देख कर बहुत खुशी हुई।

 
At 9:08 AM , Blogger kuldip said...

अनुभव हुआ। अक्सर यहां अनछपे कवि ही दिखते हैं। एक जाना पहचाना हस्ताक्षर को यहां देख कर बहुत खुशी हुई।

 
At 11:02 AM , Blogger शब्द-सृष्टी said...

हमारी आँख के आँसू भी कर लीजै स्वीकार...काश हम सब ऐसे ही बच्चे हो जाएं...कुछ पल मनुष्य बन जाएँ.

 
At 5:29 AM , Blogger Anupama Chauhan said...

Baat wahi hai shabd wahi hain...aapki kalam se utre to jaan bhar gai....

 
At 5:36 AM , Blogger Bhupendra Raghav said...

गहरी वेदना, दिल तक समाई है,
शब्दों का श्रंग ले गहरी गहराई है
हमारी समझ में बस एक बात आई है,
"नन्ही सच्चाई ", नन्ही नहीं...
वरन एक बहुत बडी सच्चाई है,

 
At 6:23 AM , Blogger सुबीर संवाद सेवा said...

अच्‍छी हेगी अशोक जी ये कविता
http://subeerin.blogspot.com

 
At 6:25 AM , Blogger सुबीर संवाद सेवा said...

अच्‍छी हेगी अशोक जी आपकी ये कविता भोत भोत अच्‍छी हेगी
पंकज सुबीर सीहोर

 
At 4:35 AM , Blogger Poonam Agrawal said...

Jeevan kee sachchai hai ye.kitnee asani se parichay karaa diya apne.Nanhi jubaan ne jis tarah kaha .shabd gahrai tak choo gaye.bahoot achchi rachnaa hai.

 
At 7:23 AM , Blogger Devi Nangrani said...

चक्रधर जी
खूब अछूती रचना के अविध्कार के लिये बधाई

असुवन के श्रधाँजली उनके नाम
जो मरकर भी नहीं मरे
बस! जिंदा दिलों की वो
धड़कन बन कर धड़कते रहे.

देवी नागरानी

 
At 5:56 AM , Blogger मीनाक्षी said...

नमस्कार अशोक जी, टी.वी पर तो आप का कार्यक्र्म देखते ही हैं. सौभाग्य कि यहाँ पढ़ने को भी मिल रहा है...

नन्ही सच्चाई सच मे मर्म को गहरे तक बेध गई है.

 
At 7:21 AM , Blogger Vaishali said...

बोली-
अंकल!
भगवान जी बीमार हैं न
पापा गए हैं देखने।


mere me itna sahas nahin hai ki aapki kisi rachna per koi bhi abhivaykti vyakt karun.....bas dil ko chho gai ye lines.........aisa sirf chakrdhar saab hi likh sakte hain............shat shat naman aapko.....

 

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